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AI in Uttar Pradesh Vidhan Sabha : अब एआई की मदद से होगी विधायकों-मंत्रियों की मॉनिटरिंग, यूपी विधानभवन में होगा बड़ा बदलाव
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Neha
- November 30, 2024
AI in Uttar Pradesh Vidhan Sabha : दुनिया के कई विकसित देशों की तरह ही भारत में भी इन दिनों एआई (Artificial Intelligence) का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ रहा है। कंटेंट क्रिएशन (Content Creation) से लेकर फोटो-वीडियो एडिट करने जैसे न जाने कितने ही कामों में एआई (AI) का इस्तेमाल हो रहा है। इसी को देखते हुए अब उत्तर प्रदेश की विधानसभा (Uttar Pradesh Assembly) में भी एआई का इस्तेमाल एक बेहद खास मकसद के लिए किए जाने की तैयारी की जा रही है।
विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान सदस्यों की होगी मॉनिटरिंग
दरअसल यूपी विधान भवन (UP Vidhan Bhawan) को देश में सबसे खूबसूरत विधान भवन बनाने के बाद अब इसे अत्याधुनिक तकनीक (Latest Technology) से लैस किया जा रहा है। इसके तहत विधानभवन में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी (Artificial Intelligence) यानि एआई की मदद से विधानसभा सत्र (Vidhan Sabha Session) के दौरान तमाम मंत्रियों और विधायकों के कामकाज और उनकी उपस्थिति की मॉनिटरिंग की जाएगी। बताया जा रहा है कि इसका मकसद विधानसभा सत्र के दौरान विधान सभा और विधान मंडल में मंत्रियों और विधायकों की अधिक से अधिक मौजूदगी और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इस संबंध में सरकार के पास प्रस्ताव भिजवाया था, जिसे राज्य सरकार अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। वहीं अगर ऐसा हो जाता है, तो विधान भवन के एआई सिस्टम से लैस करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन जाएगा।
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एआई सिस्टम से लैस होगा विधानभवन
दरअसल आमतौर पर देखा जाता है कि विधानसभा सत्र के दौरान भी सदन में विधायकों और मंत्रियों की मौजूदगी कम रहती है। वहीं जो विधायक सदन में आते भी हैं वे भी अपने क्षेत्र से जुड़े सवाल या मुद्दे पर तो सदन की कार्यवाही अटैंड करते हैं, लेकिन उसके बाद सदन से बाहर चले जाते हैं। इसी को देखते हुए विधानभवन को एआई सिस्टम से लैस करने का फैसला लिया गया है। ये सिस्टम हर सदस्य के सदन में बैठने की अवधि, बार-बार आने जाने, सवाल पूछने, सक्रिय रहने जैसी बातों का पूरा रिकॉर्ड रखेगा। सत्र के दौरान होने वाली चर्चाओं पर अपडेट रहने के लिए सदन में बैठना जरूरी है।
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एआई की मदद से डिजिटाइज किया जाएगा विधानसभा का 137 साल का डेटा
वहीं जानकारी के मुताबिक विधानसभा के डाटा को डिजिटलाइज (Data Digitalization) करने के लिए भी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके तहत साल 1887 से लेकर वर्तमान तक जितनी भी विधायी कार्यवाही हुई हैं, सभी में एआई का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पिछले 137 साल में यूपी विधानभवन के दोनों सदनों में किस नेता ने किस मुद्दे पर क्या और कब बोला, ये सेकेंडों में सामने आ जाएगा।
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