
मार्क कार्नी की चुनावी घोषणा: ट्रंप से मुकाबला
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Chhavi
- March 25, 2025
कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने रविवार को 28 अप्रैल को एक तात्कालिक चुनाव की घोषणा की। उनका कहना था कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सामना करने के लिए मजबूत जनादेश की आवश्यकता है, जो "हमें तोड़ना चाहते हैं ताकि अमेरिका हमें अपना बना सके।" यह टिप्पणी इस बात को दर्शाती है कि अमेरिकी राष्ट्रपति और कनाडा, जो लंबे समय से साथी और बड़े व्यापारिक साझेदार रहे हैं, के बीच रिश्ते कितने बिगड़ चुके हैं। ट्रंप ने कनाडा पर टैरिफ लगाया और उसे 51वां राज्य बनाने की धमकी दी, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ गई है।
हालांकि अगले चुनाव की तारीख 20 अक्टूबर को तय थी, लेकिन कार्नी ने जनवरी से उनके लिबरल पार्टी के पक्ष में हुए अप्रत्याशित सुधार को देखते हुए इस चुनाव को जल्दी कराने का फैसला किया। ट्रंप की धमकियों और पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे के बाद उनकी पार्टी को बेहतर स्थिति में देखा गया है। कार्नी ने मार्च 14 को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी और पहले कहा था कि वे ट्रंप के साथ काम कर सकते हैं, लेकिन रविवार को उन्होंने एक अधिक आक्रामक रुख अपनाया।
"हम अपने जीवन के सबसे बड़े संकट का सामना कर रहे हैं, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापारिक कार्रवाई और हमारे संप्रभुता के खिलाफ उनकी धमकियाँ हमें नुकसान पहुँचा सकती हैं," कार्नी ने कहा। "हमारा जवाब एक मजबूत अर्थव्यवस्था और अधिक सुरक्षित कनाडा बनाना होगा। राष्ट्रपति ट्रंप कहते हैं कि कनाडा एक असली देश नहीं है। वह हमें तोड़ना चाहते हैं ताकि अमेरिका हमें अपना बना सके। हम ऐसा नहीं होने देंगे।"
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ट्रंप का दबाव और चुनाव की तैयारियाँ
मार्च 6 को ट्रंप ने कनाडा पर कुछ सामानों पर 25% टैरिफ लगाने की अवधि 30 दिन के लिए बढ़ा दी थी। उसके बाद उन्होंने स्टील और एल्युमिनियम पर टैरिफ लगाया और 2 अप्रैल को अतिरिक्त सामानों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी। इस माहौल में कनाडा के लोग ट्रंप की नीति को लेकर चिंतित हैं। निक नैनोस, एक प्रमुख पोल विशेषज्ञ, ने कहा कि "कनाडाई लोगों की सबसे बड़ी चिंता इस समय ट्रंप और उनकी धमकियों के कारण होने वाला नुकसान है।"
कार्नी ने अपनी नीति में बदलाव की बात की है, जिसमें कम आय वाले वर्ग के लिए टैक्स ब्रैकेट में एक प्रतिशत की कमी का प्रस्ताव किया गया है। पोल्स के मुताबिक, लिबरल पार्टी ने इस साल की शुरुआत में आधिकारिक विपक्षी कंजरवेटिव पार्टी से पीछे रहने के बावजूद अब उनके खिलाफ मामूली बढ़त हासिल की है।
कंजरवेटिव पार्टी की प्रतिक्रिया और चुनावी रणनीति
कंजरवेटिव पार्टी, जो कार्नी को एक "एलिटिस्ट" मानती है, उनकी इस नई नीति को लेकर विरोध कर रही है। वे कार्नी पर उच्च सरकारी खर्च को जारी रखने का आरोप लगा रहे हैं और यह भी सवाल उठा रहे हैं कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत वित्तीय संपत्तियों को ब्लाइंड ट्रस्ट में कैसे ट्रांसफर किया। कार्नी ने इस सवाल पर गुस्से में प्रतिक्रिया दी और रिपोर्टर पर "विरोध और दुर्भावना" फैलाने का आरोप लगाया। यह प्रतिक्रिया कंजरवेटिव पार्टी के लिए एक अवसर हो सकती है कि वे कार्नी की पहली चुनावी यात्रा में किसी चूक का फायदा उठाएं।
कंजरवेटिव पार्टी के नेता पियरे पोलिवरे ने अपनी अभियान शुरुआत में कहा, "हमें कनाडा को पहले रखना होगा।" उनका कहना है कि उनकी नीतियाँ, जिसमें टैक्स में कटौती और संसाधन उत्पादन बढ़ाना शामिल है, कनाडा को स्वावलंबी बनाएंगी और ट्रंप से लड़ने के लिए अधिक सक्षम बनाएंगी।
क्वेबेक में चुनावी चुनौती
क्वेबेक प्रांत में अच्छे प्रदर्शन की आवश्यकता कार्नी की जीत के लिए अहम होगी। हालाँकि, उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेंस में फ्रेंच में सवाल का जवाब देने में थोड़ी कठिनाई महसूस की, जबकि पोलिवरे इस प्रांत में बेहतरीन फ्रेंच बोलते हैं। यह चुनावी रणनीति में एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है, क्योंकि पोलिवरे के पास सात चुनावों का अनुभव है।
जनता की प्रतिक्रिया और आगामी चुनाव
एंगस रीड के एक ऑनलाइन पोल के मुताबिक, लिबरल पार्टी को 42% और कंजरवेटिव पार्टी को 37% समर्थन प्राप्त है। इस पोल में 1.5% की मार्जिन ऑफ एरर है, जो 19 में से 20 बार सही साबित होती है। इसके अलावा, राजनैतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का दबाव कार्नी के पक्ष में एक मजबूत सहानुभूति पैदा कर सकता है, जिससे उनका अनुभव की कमी भी कम हो सकती है।
मार्क कार्नी का यह चुनावी ऐलान एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। उनकी आक्रामक रणनीति और ट्रंप के खिलाफ उनके बयान कनाडा के राजनीतिक परिदृश्य को बदल सकते हैं। हालांकि, उनकी नई नीतियाँ और चुनावी अभियान में विरोधी उन्हें चुनौती देंगे, लेकिन ट्रंप की धमकियों के कारण कार्नी को एक मजबूत जनादेश मिलने की संभावना है। चुनावी जंग अब शुरू हो चुकी है, और देखना यह होगा कि कनाडा के लोग किसे अपना नेता चुनते हैं।
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