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वक्फ संसोधन बिल पर जेडीयू (JDU) पार्टी में क्यों है घमासान?

वक्फ संसोधन बिल पर जेडीयू (JDU) पार्टी में क्यों है घमासान?

 

बिल के समर्थन से जेडीयू के कई नेताओं ने दिया इस्तीफ़ा 


वक्फ संशोधन विधेयक 2025 लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी 128 वोटों की जीत से पारित हो गया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (जेडीयू) ने वक्फ बिल पर मोदी सरकार का समर्थन किया। इससे पार्टी में वक्फ संशोधन बिल को लेकर घमासान मचा हुआ है। इस बिल को समर्थन देने से नाराज कई मुस्लिम नेताओं ने पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया है।

 

मुस्लिम नेता की नाराजगी


वक्फ संशोधन बिल पर जेडीयू का समर्थन करने के लिए सबसे पहले जेडीयू के मुस्लिम नेता डॉ. मोहम्मद कासिम अंसारी ने पार्टी को छोड़ने का फैसला किया और उन्होंने JDU पार्टी (जनता दल यूनाइटेड) से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद एक-एक करके पार्टी नेताओं जैसे राजू नैयर, बरेज सिद्दीकी अलीग, मोहम्मद शाहनवाज मलिक ने भी पार्टी छोड़ दी। आखिर में नदीम अख्तर ने भी इस्तीफा दे दिया। ये सभी बिहार के नेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के वक्फ संशोधन बिल का समर्थन करने के लिए नाराज हैं। इन नेताओं का कहना है कि वे पार्टी के फैसले से बहुत दुखी हैं और काले कानून के पक्ष में JDU के मतदान से आहत हैं, जो मुसलमानों पर अत्याचार करता है।

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM of Bihar) पर गंभीर आरोप लगाते हुए नीतीश कुमार जी की मानसिक स्थिति खराब बता दी है। बिल का समर्थन करने के बाद सबसे पहले जेडीयू के वरिष्ठ मुस्लिम नेता डॉ. मोहम्मद कासिम अंसारी ने पार्टी से इस्तीफा दिया। इसके बाद पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश सचिव नेता मो. नवाज मलिक ने भी पार्टी छोड़ दी।

 

 ये भी पढ़े- 128 वोटों के साथ वक्फ संशोधन बिल 2025 पारित

 

बिल पर समर्थन

 

वक्फ संसोधन बिल पर जेडीयू (JDU) पार्टी में क्यों है घमासान?

लेकिन नीतीश कुमार की पार्टी ने कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता की बात को भी खारिज करते हुए सरकार को बिहार की राजनीतिक संकट को दांव पर लगाते हुए खुलकर साथ दिया। विपक्षी पार्टी नीतीश कुमार को मुस्लिम समाज का दुश्मन बता रही है। मुस्लिम अधिकार की बात करने वाले मुस्लिम धर्मगुरु के साथ-साथ जेडीयू पार्टी के मुस्लिम नेता भी नीतीश कुमार को धोखेबाज कहकर सबक सिखाने की बात कर रहे हैं।

लोकसभा और राज्यसभा में वक्फ संशोधन बिल पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (JDU) और चंद्रबाबू नायडू (TDP), चिराग पासवान (LJPR), अरविन्द सावंत (UBT) ने डटकर विपक्ष और मुस्लिम संगठनों के दबाव के बावजूद सरकार का साथ दिया है।

 

जेडीयू के बिहार चुनाव में वोट संकट

 

वक्फ संसोधन बिल पर जेडीयू (JDU) पार्टी में क्यों है घमासान?

क्या अब नीतीश कुमार की बिहार राजनीति में संकट आ सकती है? क्या ऐसे ही जेडीयू नेताओं का पार्टी छोड़ना बिहार की सत्ता को पलट सकता है? आज सवाल उठता है कि क्या नीतीश कुमार का वक्फ बिल के समर्थन में मुस्लिम समाज का हित न करके विपक्षी पार्टी और मुस्लिम संगठन के धर्मगुरु नीतीश कुमार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। क्या आगे बिहार के चुनाव में मुस्लिम वोटों का समर्थन जेडीयू पार्टी को नहीं मिलेगा?

 

सोशल मीडिया द्वारा विरोध


सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार के पोस्ट जारी कर बिहार के सीएम को 'धोखेबाज कुमार' कहा जा रहा है, तो कहीं पोस्टर पर उनकी तुलना गिरगिट से की जा रही है, जो तेजी से रंग बदलता है। उनकी तस्वीर को फोटोशॉप के जरिए आरएसएस के ड्रेस पहना कर आरएसएस कार्यकर्ता के रूप में दर्शाया जा रहा है।

 

नीतीश के इफ्तार पार्टी में जाना और फिर बिल का समर्थन करना कहीं न कहीं नीतीश के राजनीतिक पार्टियों को बदलने के पहले कारनामों की तरफ ले जा रहा है। मुस्लिम वोट का बड़ा हिस्सा 2009 से 2015 के बीच नीतीश कुमार के गठबंधन को चुनाव में जीत हासिल करने का भागीदार था। जेडीयू कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने राज्यसभा में चर्चा के दौरान कहा कि बिल पास होने से गरीब मुस्लिमों का फायदा होगा और पसमांदा वोटर जेडीयू के साथ रहेगा।

 

देखते हैं कि JDU नेताओं का मतभेद बिहार के आने वाले चुनाव पर असर डालेगा? बता दें कि नीतीश कुमार जो धर्मनिरपेक्षता और हिंदू राष्ट्र की बात पर संविधान की दलील देते रहे हैं, वैसे नीतीश कुमार की राजनीतिक अनुभव ये कहता है कि सियासत में देश के हित के लिए पलटना पड़ता है। एनडीए के साथ जुड़कर सियासत की बात करने वाले नीतीश कुमार ये सिद्ध कर चुके हैं कि मुस्लिम वोट का फर्क नहीं पड़ेगा।

 

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