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मौसम अलर्ट के बावजूद वैष्णो देवी यात्रा क्यों नहीं रोकी गई, CM उमर अब्दुल्ला का सवाल

मौसम अलर्ट के बावजूद वैष्णो देवी यात्रा क्यों नहीं रोकी गई, CM उमर अब्दुल्ला का सवाल

भारी बारिश और बादल फटने से मचा हाहाकार

जम्मू-कश्मीर में इस साल की वैष्णो देवी यात्रा 2025 त्रासदी की खबरों के बीच सवालों के घेरे में है। रियासी और डोडा जिलों में हुई भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने मंगलवार और बुधवार को तबाही मचा दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 41 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हुए हैं। सबसे दर्दनाक घटना अर्धकुंवारी के पास हुई, जहां अचानक आए बादल फटने से 34 लोगों की जान चली गई। वहीं, डोडा जिले में तेज बारिश और बाढ़ में 4 लोगों की मौत हो गई। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है, लेकिन श्रद्धालुओं की मौत ने सबको हिला कर रख दिया है।

 

इस घटना ने वैष्णो देवी मौसम अलर्ट की गंभीरता को उजागर कर दिया है। मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी जारी की थी, इसके बावजूद यात्रा को समय रहते रोका नहीं गया। प्रशासन के इस कदम पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। तीर्थयात्रियों और उनके परिवारों का कहना है कि अगर चेतावनी के बाद यात्रा रोक दी जाती, तो अनगिनत जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। अब यह हादसा केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि सिस्टम की नाकामी के तौर पर भी देखा जा रहा है।

 

उमर अब्दुल्ला का सवाल और प्रशासन की चुप्पी

इस त्रासदी पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने बड़ा सवाल उठाया। उमर अब्दुल्ला बयान ने पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जब मौसम विभाग ने पहले ही जम्मू कश्मीर मौसम चेतावनी जारी की थी, तो यात्रा क्यों नहीं रोकी गई? उमर ने प्रशासन से पूछा कि जब हमें पहले से संकेत मिल चुके थे, तो श्रद्धालुओं को सुरक्षित जगह क्यों नहीं पहुंचाया गया? उनका कहना है कि अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सकता था, लेकिन लापरवाही ने स्थिति और भयावह बना दी।

 

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने साफ कहा कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि सिस्टम की विफलता है। उन्होंने श्राइन बोर्ड से जवाब मांगा कि आखिर चेतावनी के बाद भी तीर्थयात्रियों को ट्रैक पर क्यों जाने दिया गया। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड, जो यात्रा का संचालन करता है और जिसके अध्यक्ष उपराज्यपाल मनोज सिन्हा हैं, अब तक चुप है। अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि मौसम चेतावनी के बावजूद यात्रा रोकने में देरी क्यों की गई।

 

लोगों का कहना है कि यह त्रासदी सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि सवाल उठाती है कि क्या हमारी आपदा प्रबंधन व्यवस्था श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए तैयार है। वैष्णो देवी यात्रा 2025 जैसे धार्मिक आयोजनों में लाखों लोग हर साल शामिल होते हैं, ऐसे में प्रशासन और बोर्ड की जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। लेकिन इस बार वैष्णो देवी मौसम अलर्ट को नजरअंदाज कर दिया गया और नतीजा भयावह रहा।

 

अब सवाल साफ है, क्या इस घटना के लिए केवल प्रकृति जिम्मेदार है या प्रशासन की लापरवाही भी उतनी ही बड़ी वजह है? जम्मू कश्मीर मौसम चेतावनी को नज़रअंदाज़ करना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर समझौता करना निश्चित रूप से गंभीर चिंता का विषय है। लोगों को उम्मीद है कि इस हादसे से सबक लिया जाएगा और आने वाले समय में ऐसे हालात में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

 

 

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