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मणिपुर में राजनीतिक हलचल: क्यों लगा राष्ट्रपति शासन

मणिपुर में राजनीतिक हलचल: क्यों लगा राष्ट्रपति शासन

Manipur Presidential Rule, मणिपुर में मई 2023 से मैतई और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष चला आ रहा था। इस बीच, मणिपुर में हाल ही में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई और 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। अब सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ और इसका राज्य की जनता पर क्या असर पड़ेगा?

 

Manipur Presidential Rule: राष्ट्रपति शासन का मतलब और असर

 

जब किसी राज्य में राजनीतिक अस्थिरता होती है या सरकार बनाने में कठिनाई आती है, तब राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है। इसका मतलब है कि राज्य की चुनी हुई सरकार को भंग कर दिया जाता है और सभी प्रशासनिक शक्तियां राज्यपाल के हाथों में चली जाती हैं, जो सीधे केंद्र सरकार के निर्देशों पर काम करते हैं। इसका उद्देश्य राज्य में शांति और व्यवस्था बनाए रखना होता है, लेकिन इससे जनता को यह चिंता भी होती है कि उनके चुने हुए प्रतिनिधियों की भूमिका खत्म हो गई है।

 

मणिपुर में राजनीतिक हलचल: क्यों लगा राष्ट्रपति शासन

 

Manipur Presidential Rule: मणिपुर में क्यों बिगड़े हालात

 

एन. बिरेन सिंह के इस्तीफे के बाद भाजपा को नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति में कठिनाई हुई। राजनीतिक खींचतान के चलते समय पर विधानसभा का सत्र नहीं बुलाया जा सका। इससे राज्य में अस्थिरता और अनिश्चितता फैल गई। राज्य में सरकार बनाने की कोशिशों के बीच राजनीतिक जोड़-तोड़ भी तेज हो गई थी। ऐसे में स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन का फैसला लिया।

 

Manipur Presidential Rule: आगे की राह: क्या बदलेगा मणिपुर में

 

राष्ट्रपति शासन अधिकतम छह महीने तक चलता है, लेकिन इसे संसद की मंजूरी से बढ़ाया भी जा सकता है। इस दौरान राज्य में चुनाव कराने या नई सरकार बनाने की कोशिश की जाएगी। इसका मतलब है कि मणिपुर में राजनीति अभी और करवटें ले सकती है। लोगों की उम्मीद है कि इससे राज्य में शांति और स्थिरता वापस आएगी, लेकिन राजनीतिक माहौल में हलचल अभी भी जारी है।

 

 

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