
संजय कुमार मिश्रा की प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार समिति (EAC-PM) में नई भूमिका
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Manjushree
- March 26, 2025
संजय कुमार मिश्रा (Sanjay Kumar Mishra) को प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार (Economic Advisor) के रूप में मंगलवार को नियुक्ति किया गया।
नई दिल्ली: भारत सरकार ने ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के पूर्व प्रमुख संजय कुमार मिश्रा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आर्थिक सलाहकार समिति (EAC-PM) के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में मंगलवार को मंजूरी दी है। संजय कुमार मिश्रा (Sanjay Kumar Mishra) ने प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ईडी में अपने पद पर रहते हुए कई महत्वपूर्ण कार्य किए। यह नियुक्ति भारत सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। EAC-PM एक स्वतंत्र संस्था है जो प्रधानमंत्री को आर्थिक और उससे जुड़े मुद्दों पर सलाह देने का काम करती है। बता दें कि संजय मिश्रा (Sanjay Kumar Mishra)1984 बैच के सेवानिवृत्त आईआरएस (इनकम टैक्स) अधिकारी रह चुके हैं। उन्हें आर्थिक मामलों में गहरी समझ है। संजय कुमार मिश्रा पूर्व एक तेजतर्रार अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। वह साढ़े चार साल तक ईडी के निदेशक के पद पर कार्यरत रहे। यह एक लंबा कार्यकाल माना जाता है क्योंकि इस पद पर इतने लंबे समय तक बहुत कम अधिकारी ही टिक पाते हैं। अब वे जांच एजेंसी की भूमिका से हटकर नीति निर्धारण की भूमिका में आ गए हैं।

कौन हैं संजय मिश्रा?
1984 बैच के इनकम टैक्स कैडर के अफसर संजय मिश्रा अपने समय के सबसे युवा अधिकारी थे। संजय कुमार मिश्रा अपने बैच के सबसे कम उम्र के आईआरएस अफसर बनने वाले अधिकारी थे। वे करीब 34 साल इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में सेवा दे चुके हैं। उन्हें 19 नवंबर 2018 को ईडी का डायरेक्टर बनाया गया था और उनका कार्यकाल 15 सितंबर 2023 को पूरा हुआ था। उनका कार्यकाल कई बार बढ़ाया गया था। इससे पहले वे दिल्ली में चीफ कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स के पद पर कार्यरत थे। संजय कुमार मिश्रा (Sanjay Kumar Mishra) ने अपनी सर्विस के दौरान सबसे ज्यादा वीआईपी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों और केस की जांच की है। इसके अलावा, वे विदेशों में धन छुपाने वाले भारतीयों के मामलों को देखने वाले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी CBDT के विदेशी कर विभाग में भी सेवा दे चुके हैं। संजय मिश्रा उत्तर प्रदेश के एक मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं। उनकी हमेशा से साइंस रिसर्च में रुचि रही है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बायोकेमिस्ट्री में डिग्री प्राप्त की है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में बतौर चीफ इनकम टैक्स कमिश्नर उन्होंने कई हाई प्रोफाइल मामलों की जांच की। नेशनल हेराल्ड अखबार के मालिक गांधी परिवार द्वारा संचालित संगठन 'यंग इंडिया' में उनकी जांच ने उन्हें चर्चा में ला दिया था। इसके बाद उन्होंने ईडी प्रमुख का पद संभाला।

क्या है ईएसी-पीएम (EAC-PM)?
प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार समिति (EAC-PM) एक उच्च स्तरीय निकाय है, जो सरकार को आर्थिक मुद्दों पर सलाह और मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह समिति विभिन्न आर्थिक मुद्दों पर प्रधानमंत्री को सलाह देती है और सरकार की नीति तैयार करने में मदद करती है। इसमें विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं जो आर्थिक क्षेत्र में अनुभव रखते हैं।
संजय मिश्रा ने कई नेताओं पर कसा शिकंजा
संजय मिश्रा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहां उन्होंने कई बड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच की। संजय कुमार मिश्रा (Sanjay Kumar Mishra) ने व्यक्तिगत रूप से बड़े मामलों की निगरानी की। कार्यकाल के दौरान वे पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित कई नामी चेहरों को सलाखों के पीछे भेजने के लिए चर्चित रहे हैं। इतना ही नहीं, जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला, तमिलनाडु सरकार के मंत्री सेंथिल बालाजी, बंगाल के मंत्री पर्थ चैटर्जी और एक दर्जन से अधिक आईएएस अधिकारियों को भी संजय मिश्रा के कार्यकाल के दौरान ही जेल में भेजा गया।
आर्थिक सलाहकार के पद की जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के वर्तमान अध्यक्ष सुमन बेरी हैं। सदस्य संजीव सान्याल, डॉ. शमिका रवि, राकेश मोहन, सज्जिद चिनॉय, नीलकंठ मिश्रा, नीलेश शाह, टी.टी. राममोहन, पूनम गुप्ता सभी अंशकालिक सदस्यता के रूप में नियुक्त हैं। अब संजय मिश्रा (Sanjay Kumar Mishra) पूर्णकालिक सदस्य के रूप में EAC-PM में शामिल होने जा रहे हैं।
सरकार की आर्थिक नीतियों में योगदान
संजय कुमार मिश्रा (Sanjay Kumar Mishra) का अनुभव न केवल उनके प्रशासनिक कार्यों में बल्कि वित्तीय नीतियों, सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं में भी महत्वपूर्ण हो सकता है। अनुभवी संजय मिश्रा ईडी प्रमुख के रूप में अपने अनुभव से EAC-PM को काफी मजबूती देंगे। यह भारत सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जहां सरकार को आर्थिक विकास और वित्तीय विभाग को बढ़ावा देने के लिए उनके विचार और मार्गदर्शन का लाभ मिल सकता है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में उनके कार्यकाल विस्तार को लेकर उठी आपत्तियों के चलते यह नियुक्ति राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी चर्चा का विषय बन सकती है।
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