
नेपाल में राजशाही का रिटर्न या तख्ता पलट का पैटर्न
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Manjushree
- March 29, 2025
नेपाल (Nepal) में राजशाही और हिंदू राष्ट्र की मांग पर प्रदर्शन जोरो पर
Monarchy in Nepal: नेपाल (Nepal) में राजशाही और तख्ता पलट का इतिहास काफी जटिल और दिलचस्प रहा है। यहां पर समय-समय पर राजनीतिक अस्थिरता और सत्तारूढ़ व्यवस्था में बदलाव होते रहे हैं।
नेपाल की राजधानी काठमांडू (Kathmandu) में राजशाही की बहाली और हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर जबरदस्त बवाल छिड़ा है। इन प्रदर्शनों में हुई हिंसा और उसके बाद की घटनाओं ने नेपाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र (King Gyanendra) ने 19 फरवरी को प्रजातंत्र दिवस के अवसर पर लोगों से समर्थन मांगा था। प्रदर्शनकारी "राजा आओ, देश बचाओ," "भ्रष्ट सरकार मुर्दाबाद," और "हमें राजशाही वापस चाहिए" जैसे नारे लगा रहे थे।
राजशाही समर्थक आंदोलन (Pro-monarchy movement)
नेपाल (Nepal) में राजशाही और हिंदू राष्ट्र की मांग पर जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं। 28 मार्च 2025 को काठमांडू (Kathmandu) के टिंकुने इलाके में जुटे प्रदर्शनकारियों ने पहले शांतिपूर्ण मार्च निकाला, लेकिन जैसे ही उन्होंने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की, हालात बेकाबू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने एक इमारत में तोड़फोड़ की और उसे आग के हवाले कर दिया। इसके अलावा, उन्होंने पुलिस पर पत्थरबाजी की, जिसके जवाब में सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। इस प्रदर्शन का नेतृत्व नवराज सुवेदी (Navraj Subedi)और दुर्गा प्रसाई (Durga Prasai) के समर्थकों ने किया, जिसे राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी का भी समर्थन मिला है।
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त चेतावनी (Strict warning against protesters)
नेपाल सरकार ने इन प्रदर्शनों को असंवैधानिक करार देते हुए सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। नेपाल (Nepal) की पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है और हिंसा फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। हिंसा के बाद, नेपाल की राजधानी काठमांडू में कर्फ्यू लागू कर दिया गया और सेना की तैनाती भी कर दी गई है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है, जिसमें उन्होंने राजशाही की बहाली और हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना की मांग की है।
राजनीतिक दृष्टिकोण (Political view)
नेपाल में राजशाही (monarchy) की बहाली की मांग हाल के वर्षों में तेज हो रही है। नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार और खराब शासन के कारण जनता का एक वर्ग वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था से असंतुष्ट है। पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की वापसी की मांग भी इसी असंतोष का परिणाम है।
नेपाल के काठमांडू के टिंकुने, सिनामंगल और कोटेश्वर इलाकों में कर्फ्यू लगाने का आदेश दिया गया है। पुलिसकर्मियों ने कहा, "कर्फ्यू आदेश जारी कर दिया गया है। आपसे अनुरोध है कि आप जल्द से जल्द इस इलाके से बाहर निकल जाएं।"
जनता का एकजुट विरोध (United protest of the public)

एयरपोर्ट के पास राजशाही (monarchy) समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने एक टीवी स्टेशन के साथ-साथ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल के कार्यालय पर भी हमला बोला। समाजवादी फ्रंट के नेतृत्व में हजारों राजशाही विरोधी भृकुटीमंडप में एकत्र हुए और "गणतंत्रीय व्यवस्था अमर रहे," "भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई करो," और "राजशाही मुर्दाबाद" जैसे नारे लगाने लगे। राजशाही विरोधी मोर्चे में नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी ((Maoist Center) और सीपीएन-यूनिफाइड सोशलिस्ट जैसी राजनीतिक पार्टियां भी शामिल हुईं।
क्यों बढ़ रही है राजशाही की मांग? (Why is the demand for monarchy increasing)

नेपाल 2008 तक एक संवैधानिक राजशाही हुआ करता था, लेकिन माओवादी आंदोलन (Maoist movement) और लोकतांत्रिक बदलावों के चलते इसे एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित कर दिया गया था। हालांकि, बीते कुछ सालों में कई वर्ग नेपाल में फिर से राजशाही और हिंदू राष्ट्र की बहाली की मांग का प्रदर्शन कर रहे हैं।
पुलिस बल की तैनाती (Police force deployed)

राजशाही के समर्थकों और विरोधियों ने कई जगहों पर अलग-अलग विरोध प्रदर्शन किए। झड़प को रोकने के लिए काठमांडू में सैकड़ों पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र न्यू बानेश्वर की ओर बढ़ने का प्रयास किया तो पुलिस ने कई युवकों को हिरासत में लिया। राजशाही समर्थक राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और अन्य लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं।
नेपाल में तख्तापलट की स्थिति (Coup situation in Nepal)
बांग्लादेश में भी सरकार के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुए थे, हाल ही में जिसमें कई लोगों की जान गई थी। नेपाल में जारी राजशाही और हिंदू राष्ट्र विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए इसे बांग्लादेश में हुए राजनीतिक संकट से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, नेपाल (Nepal) में अगर हिंसा और असंतोष बढ़ता है, तो देश में राजनीतिक अस्थिरता और गहरा सकती है। इस आंदोलन में 40 से ज्यादा नेपाली संगठन शामिल हुए।
2008 में खत्म हुई थी राजशाही (The monarchy ended in 2008)
नेपाल (Nepal) के राजनीतिक दलों ने संसद के माध्यम से 2008 में 240 साल पुरानी राजशाही को समाप्त कर दिया था और तत्कालीन हिंदू राष्ट्र को एक धर्मनिरपेक्ष, संघीय, लोकतांत्रिक गणराज्य में बदल दिया था। पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने 19 मार्च को डेमाक्रेसी डे पर प्रसारित अपने वीडियो संदेश में समर्थन की अपील की थी। उसके बाद से ही उनके समर्थक राजशाही बहाली की मांग पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह (former King Gyanendra Shah) के सैकड़ों समर्थकों ने राजधानी में उनके स्वागत में रैली निकाली थी। ज्ञानेंद्र जैसे ही देश के विभिन्न भागों में धार्मिक स्थलों का दर्शन कर पोखरा से काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे, समर्थकों ने उनके पक्ष में नारे लगाने शुरू कर दिए। इस रैली का उद्देश्य नेपाल में राजशाही की पुनः स्थापना के प्रति समर्थन प्रदर्शित करना था।
कुल मिलाकर शाही नरसंहार से लेकर राजशाही के अंत तक नेपाल देश कई बार उतार चढाव से गुजरा है देखना यह है कि आज फिर से नेपाल राजशाही की ओर लौटेगा या लोकतंत्र को मजबूत करेगा, ये आने वाले समय में ही पता चलेगा।
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