
महिला नागा साधु की रहस्यमयी दुनिया, जाने कब और कैसे बनते हैं
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Ashish
- January 10, 2025
उत्तर प्रदेश की संगम नगरी प्रयागराज में 13 जनवरी से महाकुंभ शुरू हो रहा है। महाकुंभ 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी तक चलेगा। UP सरकार के अनुसार डेढ़ महीने तक चलने वाले महाकुंभ में गंगा-यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी संगम पर पवित्र डुबकी लगाने के लिए 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। महाकुंभ के संगम में स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में साधु-संत मीलों की दुरी तय करके पहुंच रहे हैं।
सनातन धर्म में साधुओं का बहुत महत्व है। हालांकि, कुंभ में आने वाले नागा साधु लोगों के आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र होते हैं। नागा साधुओं के बिना कुंभ की कल्पना नहीं की जा सकती। नागा साधुओं का पहनावा और खान-पान आम लोगों से बिल्कुल अलग होता है। पुरुषों की तरह महिला नागा साधु भी होती हैं। महिला नागा साधु भी अपना जीवन पूरी तरह से भगवान को समर्पित कर देती हैं।
सबसे अलग होती है नागा साधुओं जिंदगी
नागा साधुओं की रहस्यमयी दुनिया के बारे में तो सभी ने सुना होगा, लेकिन महिला नागा साधुओं की जिंदगी सबसे अनोखी और अलग होती है। गृहस्थ जीवन का त्याग कर चुकी महिला नागा साधुओं का दिन पूजा-पाठ से शुरू होकर पूजा-पाठ पर ही खत्म होता है। इनका जीवन कई कठिनाइयों से भरा होता है। नागा साधुओं को दुनिया से कोई मतलब नहीं होता और उनकी हर बात अनोखी होती है।
कौन बनता है नागा साधु
महिला नागा साधु बनने के बाद सभी साधु-साध्वियां उन्हें माता कहकर पुकारती हैं। माई बाड़ा में महिला नागा साधु होती हैं, जिसे अब विस्तृत रूप देकर दशनाम, संन्यासिनी नाम दिया जाता है। साधु-संतों में नागा एक उपाधि होती है। साधुओं में वैष्णव, शैव और उदासी संप्रदाय होते हैं। इन तीनों संप्रदायों के अखाड़े नागा साधु बनाते हैं।
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महिलाएं कैसे बनती हैं नागा साधु
पुरुष नागा साधु नग्न रह सकते हैं, लेकिन महिला नागा साधुओं को ऐसा करने की अनुमति नहीं होती। पुरुष नागा साधु वस्त्रधारी और दिगंबर (नग्न) होते हैं। महिलाओं को भी दीक्षा देकर नागा बनाया जाता है, लेकिन वे सभी वस्त्रधारी होती हैं। महिला नागा साधुओं के लिए माथे पर तिलक लगाना जरूरी होता है। लेकिन वे सिर्फ एक गेरू रंग का कपड़ा पहन सकती हैं जो सिला हुआ नही होता। इस कपड़े को गांठी कहते हैं।
बहुत कठिन है नागा साधु बनना
महिला नागा साधु बनने की प्रक्रिया के बारे में जानने के बाद आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे। महिला नागा साधुओं का जीवन बहुत कठिन होता है। नागा साधु बनने के लिए उन्हें कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ता है। नागा साधु या सन्यासनी बनने के लिए 10 से 15 साल तक कठोर ब्रह्मचर्य का पालन करना जरूरी होता है। नागा साधु बनने के लिए व्यक्ति को अपने गुरु को यह विश्वास दिलाना होता है कि वह इसके लिए योग्य है और अब भगवान के प्रति समर्पित है। इसके बाद गुरु नागा साधु बनने की अनुमति देते हैं। नागा साधु बनने से पहले महिला के पिछले जन्म के बारे में जाना जाता है। यह देखा जाता है कि वह भगवान के प्रति समर्पित है या नहीं। नागा साधु बनने के बाद वह कठिन साधना कर सकती है या नहीं। नागा साधु बनने से पहले महिला को जीवित रहते हुए पिंडदान करना पड़ता है और सिर मुंडवाना पड़ता है।
अखाड़े में मिलता है पूरा सम्मान
इसके बाद महिला को नदी में स्नान कराया जाता है। महिला नागा साधु पूरे दिन भगवान शिव का नाम जपती हैं और सुबह ब्रह्ममुहूर्त से शाम को भगवान दत्तात्रेय की पूजा करती हैं। दोपहर में भोजन के बाद शिव का नाम जपती हैं। अखाड़े में महिला नागा साधुओं को पूरा सम्मान दिया जाता है। कुंभ मेले के दौरान नागा साधुओं के साथ महिला साधु भी शाही स्नान करती हैं। हालांकि, पुरुष नागा के स्नान करने के बाद वे नदी में स्नान करती हैं। अखाड़े की महिला नागा साध्वियों को माई, अवधूतनी या नागिन कहा जाता है। लेकिन माई या नागिन को अखाड़े में किसी महत्वपूर्ण पद के लिए नहीं चुना जाता है।
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