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Rajasthan: व‍िश्‍वराज स‍िंह बने मेवाड़ राजघराने के उत्तराधिकारी, तलवार से अंगूठा काटकर खून से किया राजतिलक

Rajasthan: व‍िश्‍वराज स‍िंह बने मेवाड़ राजघराने के उत्तराधिकारी, तलवार से अंगूठा काटकर खून से किया राजतिलक

Rajasthan: च‍ित्‍तौड़गढ़ किले के फतह प्रकाश महल में व‍िश्‍वराज स‍िंह मेवाड़ का खून से राजतिलक की रस्‍म हुई। 400 सालों से भी ज्यादा समय के बाद उत्तराधिकार परंपरा के मुताबिक मेवाड़ राजघराने के उत्तराधिकारी के तौर पर नाथद्वारा के विधायक विश्वराज सिंह का राजतिलक समारोह आयोजित किया गया। व‍िश्‍वराज स‍िंह को मेवाड़ की गद्दी पर बैठाने की परंपरा न‍िभाई गई। वैदिक परंपरा के मुताबिक इस कार्यक्रम में पूर्णाहुति के साथ गाड़ी की पूजा के बाद सलूंबर रावत देवव्रत सिंह ने हाथ पकड़ कर विश्वराज सिंह को गद्दी पर बैठाया। इस कार्यक्रम के दौरान मेवाड़ क्षेत्र के सभी मनसबदार और ठिकानेदार मौजूद रहे। साथ ही बड़ी संख्या में राजपूत समाज के लोगों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान 21 तोपों की सलामी भी दी गई। व‍िश्‍वराज एकल‍िंगनाथ जी के 77वें दीवान होंगे।

 

चित्तौड़गढ़ दुर्ग राजतिलक की रस्‍म का साक्षी बना
493 साल बाद 25 नवंबर 2024 को चित्तौड़गढ़ दुर्ग राजतिलक की रस्‍म का साक्षी बना। कार्यक्रम में देश भर से कई लोगों ने शिरकत की। मेवाड़ की प्राचीन राजधानी रहा चित्तौड़ दुर्ग पर महाराणा विक्रमादित्य का 1531 ईस्वी में राजतिलक ही अंतिम बार का राजतिलक हुआ था। इसके बाद मेवाड़ राजवंश के 77वीं पीढ़ी के उत्तराधिकारी विश्वराज सिंह महाराणा की उपाधि चित्तौड़ दुर्ग पर धारण की। हालांकि सोशल मीडिया पर लोग इस तरह के कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं। कार्यक्रम से जुड़े महेंद्र सिंह मेड़तिया ने विरोध करने को लेकर कहा कि यह परंपरा है और इस परंपरा का किसी को विरोध नहीं करना चाहिए।

 

ढोल-नगाड़ों से मेहमानों का किया स्‍वागत
दुर्ग के सभी सातों दरवाजों पर आने वालों का ढोल-नगाड़ों से स्वागत किया गया। चित्तौड़ दुर्ग पर आयोजित कार्यक्रम में देशभर के पूर्व राजघरानों के सदस्य, रिश्तेदार और गणमान्य नागरिकों के अलावा आमजन सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। विधि-विधान से कार्यक्रम संपन्न हुआ। विश्वराज सिंह ने यज्ञ में पूर्णाहुति दी। इसके बाद रस्म शुरू हुआ।

 

देवव्रत सिंह ने राजतिलक की परंपरा निभाई
राजतिलक परंपरा के अनुसार सलूंबर रावत देवव्रत सिंह राजतिलक की परंपरा निभाई। इसके बाद उमराव, बत्तीसा, सरदार और सभी समाजों के प्रमुख लोगों ने नजराना किया। इसके बाद कुल देवी बाण माता के दर्शन किए।

 

सिटी पैलेस में धूणी दर्शन करने का कार्यक्रम
चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर आयोजित कार्यक्रम के बाद उदयपुर सिटी पैलेस में धूणी के दर्शन करने का कार्यक्रम है। यहां से एकलिंगनाथ मंद‍िर जाएंगे। वहां पर भगवान एकलिंगनाथ के आशीर्वाद से पंडित महाराणा का शोक भंग करवाकर रंग बदला जाता है। जिसके बाद महाराणा सफेद के बजाएं रंग वाली पाग पहन सकेंगे।

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